5 best horror stories in hindi language | हॉरर स्टोरी इन हिंदी

हेलो दोस्तों! Alertsvala पर आपका स्वागत है आज में आपको 5 best horror stories in hindi में बताने वाला हु। इस horror stories in Hindi में पढ़ने के बाद शायद आपको डर का अहसास हो और शायद आपको रात में नींद भी न आये।

मैंने यहाँ पर बताई हुई हर एक भूतिया कहानी real horror story in hindi में है, तो आप इसको काल्पनिक समझने की भूल मत करना। यह ghost stories ऐसे किस्सों पर आधारित है जिसे आप यातो सच मान सकते है और अगर आप भुत को नहीं मानते तो इस haunted story in hindi में पढ़ने के बाद आप भुत पर यकीन करना सुरु कर दीजिये।

यहाँ पर दी गई सारी best horror story in hindi language में दी गई है यानी की सभी ghost stories इन हिंदी भाषा में लिखी गई है जिससे समझने में आसानी हो।

प्रेतनी के प्रेम में पागल – New Horror Story

सच्चा प्रेम बहुत मुश्किल से मिलता है, क्योंकि आज के स्वार्थ से परिपूर्ण जीवन में, दुनिया में सच्चे प्रेम का महत्व रह ही नहीं जाता। कहीं खूबसूरती के दिवाने मिल जाते हैं तो कहीं वाकपटुता एक दूसरे को करीब ला देती है पर अधिकतर मामलों में हवस ही प्रधान होती है।

चार दिनों का साथ फिर चल दिए किसी और की तलाश में। दिल मिले, ऐसा बहुत कम होता है, क्योंकि अगर दिल मिल गए तो वे कभी एक दूसरे से अलग हो ही नहीं सकते और निश्वार्थ भाव से, अपने सुख की बलि देकर भी दूसरे के सुख की चाह को कायम रखते हैं।

दुनिया भी तेजी से बदल रही है और आज दुनिया के सार्वभौमिकरण के कारण प्रेम, रिस्तों की परिभाषा भी बदल रही है। हमारी संस्कृति, हमारे व्यवहार, कार्य आदि से दूसरे प्रभावित हो रहे हैं तो दूसरों के इन बातों से हम भी। आज गर्ल फ्रेंड या ब्वाय फ्रेंड (यार) होना आम बात हो गई है, कुछ देशों में तो बस इसे यार, दोस्त के रूप में देखा जाता है पर कुछ देशों में इसका मतलब यार, दोस्त से कुछ अलग या बढ़कर ही होता है।

खैर आज के समय में प्रेम करने के लिए, प्रेम दर्शाने के लिए लोगों के पास समय की भी कमी हो गई है। लोग सबकुछ चट मँगनी, पट विवाह की तर्ज पर चाहते हैं।

सूरज, जी हाँ यही नाम था उस लड़के का। उम्र कोई 19-20 की होगी, एकदम से दुबला-पतला। पढ़ने में ठीक-ठाक था।

शहर में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा था। वह जिस महाविद्यालय में पढ़ाई करता था, वह शहर से थोड़ा बाहर था और पूरी तरह से जंगल जैसे क्षेत्र में था। वह अपने महाविद्यालय के ही हास्टल में रहता था।

वह जिस हास्टल में रहता था, वह पाँच मंजिला था। सूरज का कमरा चौथी मंजिल पर था। कभी अगर वह भूलबस अपने कमरे की खिड़कियां या दरवाजे को खुला छोड़ देता तो बंदर, गिलहरी आदि उनके कमरे में आ जाते।

सूरज प्रतिदिन शाम को लगभग पाँच बचे अपने कमरे से बाहर निकल कर बालकनी में बैठकर हारमोनियम बजाता और गुनगुनाता। उसे प्रकृति की गोद में होने का एहसास होता, जिससे उसके चेहरे पर बराबर प्रसन्नता छाई रहती और पढ़ने में भी खूब मन लगता।

new horror story
New Horror Story

एक दिन जब वह बालकनी में बैठकर हारमोनियम बजा रहा था और सुमधुर आवाज में गुनगुना रहा था तभी अचानक उसे पता नहीं क्यों ऐसा लगा कि कुछ दूरी पर एक जंगली पेड़ की ओट से कोई उसे देख रहा है।

वह थोड़ा सकपका गया पर थोड़ा संभलकर और हारमोनियम बजाना बंद करके गुनगुनाते हुए ही खड़ा होकर दूर उस पेड़ के आस-पास देखने लगा, पर अब उसे वहाँ कोई दिखाई नहीं दे रहा था। उसने इसे अपने मन का वहम मान लिया तथा साथ में यह भी कि, हो सकता है कोई छात्र आदि हो, जो उधर घूमने गया हो।

पर ऐसा संभव नहीं था क्योंकि वह पेड़ थोड़ा दूर था और उधर कभी भी कोई छात्र अकेले नहीं जाता था, हाँ कभी-कभी कुछ उत्साही छात्र जाते थे पर वे भी टोली में। खैर वह फिर से आकर, बैठकर हारमोनियम बजाने लगा पर अब उसका मन हारमोनियम बजाने और गुनगुनाने में न लगकर बार-बार उसी पेड़ की ओर चला जाता।

दूसरे दिन जब वह बालकनी में हारमोनियम लेकर बैठने ही जा रहा था तभी अचानक उसका ध्यान उस जंगली पेड़ की तरफ चला गया पर वहाँ उसे कोई नहीं दिखा।

फिर वह बालकनी में बैठकर हारमोनियम बजाने लगा पर पता नहीं क्यों हारमोनियम बजाते-बजाते आज भी अचानक उसका ध्यान उधर जाने लगा। उसने अपने मन व आँखों पर काबू करने की कोशिश करके ज्योंही एक लंबी तान छेड़ना चाहा त्योहीं फिर से उसका ध्यान उस पेड़ की ओर चला गया।

हाँ, वहाँ अब कोई तो दिखाई दिया जो थोड़ा सा पेड़ की आड़ में होकर इसके तरफ ही शायद देख रहा था। सूरज अपनी जगह पर खड़ा हो गया और गौर से उस पेड़ की ओट में खड़े व्यक्ति पर अपनी नजरें टिकाने की कोशिश करने लगा।

जी हाँ, वहाँ कोई तो था, और वह भी अकेले। और इतना ही नहीं यह भी सही बात थी कि वह सूरज को ही देख रहा था पर अभी भी यह क्लियर नहीं हो पा रहा था कि कौन है, कोई बाहरी आदमी, कोई औरत या महाविद्यालय की ही कोई छात्र या छात्रा।

रात को सूरज की नींद गायब थी, वह लेटे-लेटे बार-बार यही सोचने की कोशिश कर रहा था कि आखिर वह कौन है जो पेड़ की ओट से उस पर नजर लगाए रहता है, कहीं कोई गलत इरादे से तो उसे नहीं देख रहा?

बहुत सारे अनर्गल सवाल भी अब उसके जेहन में आने लगे थे। खैर कैसे भी करके सुबह में उसे हल्की सी नींद आई पर लगभग 7 बजे उसके बगल वाले कमरे में रहने वाले बच्चे ने से हाँक लगाकर उसे जगा दिया।

उसे कुछ काम था। सूरज जगकर अपने दरवाजे की किवाड़ खोला और उस बच्चे द्वारा कुछ माँगने पर उसे दे दिया। फिर वह जंभाई लेते हुए बालकनी में आ गया। अरे यह क्या, इतनी सुबह, फिर उस पेड़ के पीछे उसे कोई दिखाई दिया।

पर आज वह व्यक्ति ऐसा लग रहा था कि हाथ के इशारे से उसे बुला रहा हो। दूरी थोड़ी अधिक थी और छोटे-छोटे झुरमुट और पेड़ आदि भी तो थे इसलिए कौन है, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था।

खैर अब सूरज पूरी तरह से तल्लीन होकर उस पेड़ के पास ही देखने लगा था।

धीरे-धीरे सूरज के मन एकाग्रता और शरीर की बेचैनी बढ़नी शुरू हो गई थी और अब उसे ऐसा लग रहा था कि उस पेड़ के पास कोई किशोरी खड़ी है जो हाथ के इशारे से उसे बुला रही है।

सूरज को पता नहीं अब क्या होने लगा था, उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था, वह क्या करे, क्या ना करे, अब उसके हाथ में नहीं था। अचानक सूरज को आभास हुआ कि वह यहाँ से आराम से कूदकर उस बाला के पास जा सकता है।

पता नहीं उसकी मानसिकता कैसे इतना बदल गई कि वह आव देखा न ताव और अचानक उस चौथे मंजिल के बालकनी से छलांग लगा दी।

छलांग लगाते ही उसे ऐसा लगा कि पेड़ के पास खड़ी लड़की अचानक उड़कर उसके पास आ गई और उसे थामकर उसी पेड़ के पास लेकर चली गई। यह सब इतना जल्दी हुआ कि सूरज कुछ भी समझ नहीं पाया।

पेड़ के पास जाकर सूरज एक बिछुड़े प्रेमी की तरह गुनगुनाने लगा और वह बाला मंद-मंद मुस्कान के साथ थिरकने लगी।

सूरज तो पूरी तरह से खोया हुआ था, उसे कुछ भी पता नहीं चल रहा था, वह कौन है और कैसे यहाँ आ गया।

खैर सूरज को कूदते हुए उसके बगल वाले कमरे के लड़के ने देख लिया था जो नहाने के बाद तौलिया सूखने के लिए डालने के लिए अपने कमरे से बाहर आया था, पर वह बेहोशी हालत में था, क्योंकि उसने कूदने के बाद सूरज को उड़ते हुए उस पेड़ के पास जाता देख लिया था।

उसे अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था क्योंकि उसने जो देखा था वह बस काल्पनिकता में ही संभव था।

खैर उसने हिम्मत करके आस-पास के कमरों के छात्रों को यह बात बताई और फिर उन छात्रों ने एक चपरासी को लेकर उस पेड़ के पास जाने का निश्चय किया।

उस पेड़ के पास पहुँचकर छात्रों ने देखा कि सूरज तो प्रसन्न मन से गाए जा रहा था पर उसके हाव-भाव से ऐसा लग रहा था कि वह गाना अकेले नहीं किसी और के साथ गा रहा है।

छात्रों को वहाँ देखकर भी सूरज पर कोई असर नहीं हुआ, वह इन लोगों से बेखबर गाए जा रहा था। अंत में उसके कमरे के बगल वाले कमरे के लड़के ने उसे पकड़कर रोकना चाहा पर फिर भी सूरज अनजान था कि वहाँ ये छात्र आदि भी हैं।

अचानक, सूरज का गाना बंद हो गया और वह तेज आवाज में चिल्लाया, कहाँ गई तुम, देखो! आँखमिचौली न खेलो, मेरे सामने आओ। इसके बाद एक दो और छात्रों ने सूरज को पकड़कर वहाँ बैठाने की कोशिश करने लगे पर सूरज तो बस चिल्लाए जा रहा था, कहाँ गई तुम?

अचानक चपरासी ने वहीं किसी पौधे के एक-दो पत्तों को तोड़कर मसला और उसे सूरज को सूँघा दिया, सूरज तो बहुत ही जोर की छींक आई और वह अब होश में आने लगा था। वह कौन है, अब उसे इसका भान हो चुका था।

उसे वहाँ अपने को पाकर बहुत हैरानी हुई, फिर उन छात्रों से पूछने लगा कि हम लोग यहाँ कब आ गए? मैं तो अपनी बालकनी में था, फिर यहाँ कैसे, फिर उसे थोड़ा सा याद आया कि वह तो बालकनी से कूदा था और कोई बाला उसे यहाँ आई थी, पर उसने कुछ बोला नहीं?

खैर छात्रों ने उसे चलने के लिए कहा और साथ ही यह भी कहा कि बस ऐसे ही आ गए थे।

तुमने ही तो चलने के लिए कहा था। फिर छात्रों ने उसे बातों में उलझा लिया और उसके प्रश्नों का जवाब ठीक से न देकर घुमा दिए। खैर अब दोनों एक दूसरे (यानि छात्र और सूरज) से कुच छिपा रहे थे।

सूरज उन छात्रों के साथ हास्टल में आया। सभी लगभग घंटों तक बैठे रहे। कोई पढ़ने नहीं गया।

चपरासी भी सूरज के कमरे में ही बैठा था, वह कुछ कहना चाह रहा था पर कह नहीं पा रहा था। अंत में उसने अपने आप को रोक नहीं पाया और वहाँ बैठे सभी छात्रों से कहा कि उस पेड़ के पास कोई आत्मा है,

इसका उसे भी एहसास है, पर वह आत्मा कभी उसके सामने तो नहीं आई न कभी उसका कुछ बुरा ही हुआ पर आत्मा जरूर है, इसका उसे कई बार आभास हो चुका है।

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आत्मा से प्यार – Real Horror Story in Hindi

मै हिंदुस्तान यूनिलीवर कंपनी में ऑपरेटर का काम करता हु। मेरा घर कंपनी से 10 किमी दूर है।

मेरे पास एक बाइक जिससे मै अपना घर से कम्पनी और कम्पनी से घर का सफर पूरा करता हु। एक दिन ऑफिस से घर जा रहा था तो रास्ते में मुझे मेरे कॉलेज [जिसमें मैंने अपनी ग्रेजुएशन पुरी की थी ] के बाहर एक लडकी दिखाई दी, जो मुझे देखकर मुस्करा रही थी।

मैने उसे टालते हुए मै घर की ओर निकल पड़ा।

दुसरे दिन फिर वोही लडकी मुझे उसी जगह पर दिखाई दी। वो भी मुस्करा रही थी और मै भी मुस्कुराता हुआ निकल पड़ा। मूझे उसकी प्यारी से मुस्कान से प्यार हो गया था लेकिन कभी रुकने की कोशिश नहीं की।

वो लडकी कई दिनों तक मुझे दिखी और एक दिन वो मुझे वहा नहीं दिखाई दी। मै बैचैन हो गया लेकिन मै उसके बारे में कुछ नहीं जानता था उअर ना कभी बात की थी इसलिए उसका पता भी नहीं लगा सकता था।

मई कई दिनों तक उस लडकी के नहीं दिखने से बैचेन रहा।

कई बार तो मै कम्पनी से जल्दी निकलकर उसका इन्तेजार भी करता पर वो मुझे नहीं दिखी।

एक दिन मेरे मोबाइल पर किसी अनजाने नंबर से फ़ोन आया | मैंने फ़ोन उठाया तो एक लडकी बोली। उसने मेरा नाम पूछा और वो मुझसे बात करने लगी और बताया कि मै वही लडकी हु जिसे तुम रोज़ बाइक से गुजरते हुए देखा करते थे।

मै अचम्भित रह गया कि इसके पास मेरा नंबर कैसे आया और ये मेरसे क्यों बात कर रही है। लेकिन उसकी मीठी बातो में इतना खो गया कि ये सब बाते भूल गया। एक दिन उसने मुझे कॉलेज के बाहर मिलने के लिए बुलाया।

मै और मेरा दोस्त हम दोनों बाइक पर उससे मिलने को गये क्यूंकि कभी मै लडकी से अकेले नहीं मिला था तो घबरा रहा था।

मै और मेरा दोस्त जैसे ही कॉलेज के बाहर पहुचे तो वहा वो लडकी कही पर भी दिखाई नहीं दी। मैंने काफी फ़ोन लगाया लेकिन फ़ोन स्विच ऑफ था।

Real Horror Story
Real Horror Story

मै घर लौट गया उर घर में घुसते ही उसका फोन आया तो मैंने गुस्से से कहा कि हम वहा पर आपका इंतजार कर रहे थे आप क्यों नहीं आयी। तो उसने कहा कि तुम अपने दोस्त को क्यों साथ लेकर आये थे मुझसे अकेले मिलने आना। मैंने कहा ठीक है।

अगले दिन सुबह सुबह मैंने उसके फ़ोन लगाया लेकिन उसकी मम्मी ने फ़ोन उठा लिया।

मै एक बार तो डर गया लेकिन कॉलेज के प्रोजेक्ट का बहाना कर उससे बात करने को उसकी मम्मी से कहा।

उसकी मम्मी ने कहा पागल हो गये हो क्या प्रिया को मरे तो तीन महीने हो चुके है।

मै हक्का बक्का रह गया और मेरे हाथ से मोबाइल छुट गया और मै बुरी तरह कांपने लगा। मैने सोचा कि जिस लडकी को देख रहा था और जिससे मै बात कर रहा था वो एक आत्मा थी। मुझे फिर भी विश्वास नहीं आया।

मैंने अगले दिन फिर प्रिया की मम्मी के फ़ोन लगाकर सारी घटना सुनाई तो उन्होंने कहा मेरी बात पर यकीन ना हो तो मेरे घर आकर देख लो | मैं प्रिया के घर गया तो प्रिया के फोटो पर माला लगी थी।

उसकी माँ ये घटना सुनकर भावुक गो गयी लेकिन उस दिन से मैंने अपनी वो सिम निकालकर फेंक दी और नए नंबर ले लिए और फिर कभी फोन नहीं आया। लेकिन आज भी मै अनजान नंबर से अक्सर सहम जाता हु।

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प्रेतों का खेल – Haunted Story in Hindi

भूत-प्रेतों की लीला भी अपरम्पार होती है। कभी-कभी ये बहुत ही सज्जनता से पेश आते हैं तो कभी-कभी इनका उग्र रूप अच्छे-अच्छों की धोती गीली कर देता है।

भूत-प्रेतों में बहुत कम ऐसे होते हैं जो आसानी से काबू में आ जाएँ नहीं तो अधिकतर सोखाओं-पंडितों को पानी पिलाकर रख देते हैं, उनकी नानी की याद दिला देते हैं।

आज की कहानी एक ऐसे प्रेत की है जिसको कोई भी सोखा-पंडित अपने काबू में नहीं कर पाए और ना ही वह प्रेत किसी देवी-देवता से ही डरता था। क्या वह प्रेत ही था या कोई और??? आइए जानने की कोशिश करते हैं।

हमारी भी इस प्रेत को जानने की उत्कंठा अतितीव्र हो गई थी जब हमने पहली बार ही इसके बारे में सुना।

दरअसल लोगों से पता चला कि इस प्रेत ने बहुत सारे सोखाओं-पंडितों को घिसरा-घिसराकर मारा और इतना ही नहीं जब इसे किसी देवी या देवता के स्थान पर लेकर जाया गया तो इसने उस देवी या देवता की भी खुलकर खिल्ली उड़ाई और उन्हें चुनौती दे डाली कि पहले पहचान, मैं कौन??? और शायद इस कौन का उत्तर किसी के पास नहीं था चाहें वह सोखा हो या किसी देवी या देवता का बहुत बड़ा भक्त या पुजारी।

अभी से आप मत सोंचिए की यह कौन था जिसका पता बड़े-बड़े सोखा और पंडित तक नहीं लगा पाए? क्या इस कहानी को पढ़ने के बाद भी इस रहस्य से परदा नहीं उठेगा? इस रहस्यमयी प्रेत के पहचान मैं कौन पर से परदा उठेगा और यह परदा शायद वह प्रेत ही उठाएगा क्योंकि उससे अच्छा उसको कौन समझ सकता है।

यह कहानी हमारे गाँव-जवार की नहीं है। ये कहानी है हमारे जिले से सटे कुशीनगर जिले के एक गाँव की। यह गाँव पडरौना के पास है। अब आप सोंच रहे होंगे कि यह कहानी जब मेरे जिले की नहीं है तो फिर मैं इसे कैसे सुना रहा हूँ।

मान्यवर इस गाँव में मेरी रिस्तेदारी पड़ती है अस्तु इस कहानी को मैं भी अच्छी तरह से बयाँ कर सकता हूँ। भूत-प्रेतों की तरह से इस कहानी को रहस्यमयी न बनाते हुए मैं सीधे अपनी बात पर आ जाता हूँ।

इस गाँव में एक पंडीजी हैं जो बहुत ही सुशील, सभ्य और नेक इंसान हैं। यह कहानी घटिट होने से पहले तक ये पंडीजी एक बड़े माने-जाने ठीकेदार हुआ करते थे और ठीके के काम से अधिकतर घर से दूर ही रहा करते थे।

हप्ते या पंद्रह दिन में इनका घर पर आना-जाना होता था। ये ठीका लेकर सड़क आदि बनवाने का काम करते थे। इनके घर के सभी लोग भी बड़े ही सुशिक्षित एवं सज्जन प्रकृति के आदमी हैं।

इनकी पत्नी तो साधु स्वभाव की हैं और एक कुशल गृहिणी होने के साथ ही साथ बहुत ही धर्मनिष्ठ हैं। एकबार की बात है कि पंडीजी ठीके के काम से बाहर गए हुए थे पर दो दिन के बाद ही उनको दो लोग उनके घर पर पहुँचाने आए।

पंडीजी के घरवालों को उन दो व्यक्तियों ने बताया कि पता नहीं क्यों कल से ही पंडीजी कुछ अजीब हरकत कर रहे हैं। जैसे कल रात को सात मजदूरों ने अपने लिए खाना बनाया था और ये जिद करके उनलोगों के साथ ही खाना खाने बैठे पर मजदूरों ने कहा कि पंडीजी पहले आप खा लें फिर हम खाएँगे।

और इसके बाद जब ये खाना खाने बैठे तो सातों मजदूरो का खाना अकेले खा गए और तो और ये खाना भी आदमी जैसा नहीं निशाचरों जैसा खा रहे थे।

उसके बाद दो मजदूर तो डरकर वहाँ से भाग ही गए। फिर हम लोगों को पता चला। उसके बाद हम लोग भी वहाँ पहुँचे और इनको किसी तरह सुलाए और सुबह होते ही इनको पहुँचाने के लिए निकल पड़े।

इसके बाद वे दोनों व्यक्ति चले गए और पंडीजी भी आराम से अपनी कोठरी में चले गए। कुछ देर के बाद पंडीजी लुँगी लपेटे घर से बाहर आए और घरवालों के मना करने के बावजूद भी खेतों की ओर निकल गए।

घर का एक व्यक्ति भी (इनके छोटे भाई) चुपके से इनके पीछे-पीछे हो लिया। जब पंडीजी गाँव से बाहर निकले तो अपने ही आम के बगीचे में चले गए।

आम के बगीचे में पहुँचकर कुछ समय तो पंडीजी टहलते रहे पर पता नहीं अचानक उनको क्या हुआ कि आम की नीचे झुलती हुई मोटी-मोटी डालियों को ऐसे टोड़ने लगे जैसे हनुमान का बल उनमें आ गया हो।

डालियों के टूटने की आवाज सुनकर इनके छोटे भाई दौड़कर बगीचे में पहुँचे और इनको ऐसा करने से रोकने लगे। जब इनके छोटे भाई ने बहुत ही मान-मनौवल की तब पंडीजी थोड़ा शांत हुए और घर पर वापस आ गए।

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इस घटना के बाद तो पंडीजी के पूरे परिवार के साथ ही साथ इनका पूरा गाँव भी संशय में जीने लगा। एक दिन फिर क्या हुआ की पंडीजी अपनी ही कोठरी में बैठकर अपने बच्चे को पढ़ा रहे थे और इनकी पत्नी वहीं बैठकर रामायण पढ़ रही थीं तभी इनकी पत्नी क्या देखती हैं कि पंडीजी की शरीर फूलती जा रही है और चेहरा भी क्रोध से लाल होता जा रहा है।

अभी पंडीजी की पत्नी कुछ समझती तबतक पंडीजी अपने ही बेटे का सिर अपने मुँह में लेकर ऐसा लग रहा था कि जैसे चबा जाएँगे पर इनकी पत्नी डरी नहीं और सभ्य भाषा में बच्चे को छोड़ने की विनती कीं।

अचानक पंडीजी बच्चे का सिर मुँह से निकालकर शांत होने लगे और रोते बच्चे का सिर सहलाने लगे। इस घटना के बाद तो पंडीजी के घरवालों की चैन और नींद ही हराम हो गई।

वे लोग पूजा-पाठ करवाने के साथ ही साथ कइ सारे डाक्टरों से संपर्क भी किए। यहाँ तक कि उन्हे कई बड़े-बड़े अस्पतालों में दिखाया गया पर डाक्टरों की कोई भी दवा काम नहीं की और इधर एक-दो दिन पर पंडीजी कोई न कोई भयानक कार्य करके सबको सकते में डालते ही रहे।

डाक्टरों से दिखाने का सिलसिला लगभग 2 महीने तक चलता रहा पर पंडीजी के हालत में सुधार नाममात्र भी नहीं हुआ। हाँ पर अब सबके समझ में एक बात आ गई थी और वह यह कि जब भी पंडीजी की शरीर फूलने लगती थी और उनका चेहरा तमतमाने लगता था तो घर वाले उनकी पत्नी को बुला लाते थे और पंडीजी अपनी पत्नी को देखते ही शांत हो जाते थे।

Haunted Story in Hindi
Haunted Story in Hindi

एकदिन पंडीजी की पत्नी पूजा कर रही थीं तभी पंडीजी वहाँ आ गए और अपनी पत्नी से हँसकर पूछे कि तुम पूजा क्यों कर रही हो? पंडीजी की पत्नी ने कहा कि आप अच्छा हो जाएँ , इसलिए।

अपनी पत्नी की बात सुनकर पंडीजी ठहाका मार कर हँसने लगे और हँसते-हँसते अचानक बोल पड़े की कितना भी पूजा-पाठ कर लो पर मैं इसे छोड़नेवाला नहीं हूँ अगर मैं इसे छोड़ुँगा तो इसे इस लोक से भेजने के बाद ही।

पंडीजी की यह बात सुनकर पंडीजी की पत्नी सहमीं तो जरूर पर उन्होंने हिम्मत करके पूछा आप कौन हैं और मेरे पति ने आपका क्या बिगाड़ा हैं? इसपर पंडीजी ने कहा कि मैं कौन हूँ यह मैं नहीं जानता और इसने मेरा क्या बिगाड़ा है मैं यह भी नहीं बताऊँगा।

पंडीजी की पत्नी ने जब यह बात अपने घरवालों को बताई तो पंडीजी के घरवालों ने उस जवार में जितने सोखा-पंडित हैं उन सबसे संपर्क करना शुरु किया।

पहले तो कुछ सोखा-पंडितों ने झाड़-फूँक किया पर कुछ फायदा नहीं हुआ। एकदिन पंडीजी के घरवालों ने पंडीजी को लेकर उसी जवार (क्षेत्र) के एक नामी सोखा के पास पहुँचे।

सोखाबाबा कुछ मंत्र बुदबुदाए और पंडीजी की ओर देखते हुए बोले कि तुम चाहें कोई भी हो पर तुम्हें इसे छोड़कर जाना ही होगा नहीं तो मैं तुम्हें जलाकर भस्म कर दूँगा।

जब सोखाबाबा ने भस्म करने की बात कही तो पंडीजी का चेहरा तमतमा उठा और वे वहीं उस सोखा को कपड़े की तरह पटक-पटककर लगे मारने। सोखा की सारी शेखी रफूचक्कर हो गई थी और वह गिड़गिड़ाने लगा था।

फिर पंडीजी की पत्नी ने बीच-बचाव किया और सोखा की जान बची। पंडीजी द्वारा सोखा के पिटाई की खबर आग की तरह पूरे जवार क्या कई जिलों में फैल गई।

अब तो कोई सोखा या पंडित उस पंडीजी से मिलना तो दूर उनका नाम सुनकर ही काँपने लगता था। इसी दौरान पंडीजी को लेकर एक देवी माँ के स्थान पर पहुँचा गया पर देवी माँ (देवी माँ जिस महिला के ऊपर वास करती थीं उस महिला ने देवी-वास के समय) ने साफ मना कर दिया कि वे ऐसे दुष्ट और असभ्य व्यक्ति के मुँह भी लगना नहीं चाहतीं।

पंडीजी उस स्थान पर पहुँचकर मुस्कुरा रहे थे और अपनी पत्नी से बोले की जो देवी मेरे सामने आने से घबरा रही है वह मुझे क्या भगाएगी? देवी माँ ने पंडीजी के घरवालों से कहा कि यह कौन है यह भी पहचानना मुश्किल है।

आप लोग इसे लेकर बड़े-बड़े तीर्थ-स्थानों पर जाइए हो सकता है कि यह इस पंडीजी को छोड़ दे। इसके बाद पंडीजी के घरवाले पंडीजी को लेकर बहुत सारे तीर्थ स्थानों (जैसे मैहर, विंध्याचल, काशी, थावें, कुछ नामी मजार आदि) पर गए पर कुछ भी फायदा नहीं हुआ।

यहाँ तक की अब पंडीजी अपने घरवालों के साथ इन तीर्थों पर आसानी से जाते रहे और घूमते रहे। अधिकतर तीर्थ-स्थान घूमाने के बाद भी जब वह प्रेत पंडीजी को नहीं छोड़ा तो पंडीजी के घरवाले घर पर ही प्रतिदिन विधिवत पूजा-पाठ कराने लगे। पंडीजी की पत्नी प्रतिदिन उपवास रखकर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने लगीं।

एक दिन पंडीजी अपने घरवालों को अपने पास बुलाए और बोले की आप सभी लोग खेतों में जाकर कम से कम एक-एक पीपल का पेड़ लगा दीजिए।

पंडीजी की पत्नी बोल पड़ी कि अगर आपकी यही इच्छा है तो एक-एक क्या हम लोग ग्यारह-ग्यारह पीपल का पेड़ लगाएँगे।

इसके बाद पंडीजी के घरवाले पंडीजी को साथ लेकर उसी दिन खेतों में गए और इधर-उधर से खोजखाज कर एक-एक पीपल का पेड़ लगाए और पंडीजी से बोले कि हमलोग बराबर पीपल का पेड़ लगाते रहेंगे।

इस घटना के बाद पंडीजी थोड़ा शांत रहने लगे थे।

अब वे अपने घर का छोटा-मोटा काम भी करने लगे थे। एक दिन पंडीजी के बड़े भाई घर के दरवाजे पर लकड़ी फाड़ रहे थे।

पंडीजी वहाँ पहुँचकर टाँगी अपने हाथ में ले लिए और देखते ही देखते लकड़ी की तीन मोटी सिल्लियों को फाड़ दिए। शायद इन तीनों सिल्लियों को फाड़ने में उनके भाई महीनों लगाते।

एक दिन लगभग सुबह के चार बजे होंगे कि पंडीजी ने अपनी पत्नी को जगाया और बोल पड़े, मैं जा रहा हूँ। पंडीजी की पत्नी बोल पड़ी, अभी तो रात है और इस रात में आप कहाँ जा रहें हैं? अपनी पत्नी की यह बात सुनकर पंडीजी हँसे और बोले, मैं जा रहा हूँ और वह भी अकेले।

तेरे सुहाग को तेरे पास छोड़कर। अब मैं तेरे पति को और तुम लोगों को कभी तंग नहीं करूँगा। तूँ जल्दी से अपने पूरे घरवालों को जगवाओ ताकि जाने से पहले मैं उन सबसे भी मिल लूँ।

पंडीजी के इतना कहते ही पंडीजी की पत्नी के आँखों से झर-झर-झर आँसू झरने लगे और वे पंडीजी का पैर पकड़कर खूब तेज रोने लगीं। अब तो पंडीजी के पत्नी के रोने की आवाज सुनकर घर के लोग ऐसे ही भयभीत हो गए और दौड़-भागकर पंडीजी के कमरे में पहुँचे।

अरे यह क्या पंडीजी के कमरे का माहौल तो एकदम अच्छा था क्योंकि पंडीजी तो मुस्कुराए जा रहे थे। घरवालों ने पंडीजी की पत्नी को चुप कराया और रोने का कारण पूछा।

पंडीजी की पत्नी के बोलने से पहले ही पंडीजी स्वयं बोल पड़े की अब मैं सदा सदा के लिए आपके घर के इस सदस्य (पंडीजी) को छोड़कर जा रहा हूँ।

अब आपलोगों को कष्ट देने कभी नहीं आऊँगा। पंडीजी के इतना कहते ही पंडीजी की पत्नी बोल पड़ी, आप जो भी हों, मेरी गल्तियों को क्षमा करेंगे, क्या मैं जान सकती हूँ की आप कौन हैं और मेरे पति को क्यों पकड़ रखे थे?

इतना सुनते ही पंडीजी बहुत जोर से हँसे और बोले मैं ब्रह्म-प्रेत (बरम-पिचाश) हूँ। मेरा कोई भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता और तेरे पति ने उसी पीपल के पेड़ को कटवा दिया था जिसपर मैं हजारों वर्षों से रहा करता था।

इसने मेरा घर ही उजाड़ दिया था इसलिए मैंने भी इसको बर्बाद करने की ठान ली थी पर तुम लोगों की अच्छाई ने मुझे ऐसा करने से रोक लिया। इस घटना के बाद से वे ब्रह्म-प्रेत महराजजी उस पंडीजी को छोड़कर सदा-सदा के लिए जा चुके हैं।

आज पंडीजी एवं उनका परिवार एकदम खुशहाल और सुख-समृद्ध है। पर ब्रह्म-प्रेत महराज के जाने के बाद भी अगर कुछ बचा है तो उनकी यादें और विशेषकर उन सोखाओं के जेहन में जिनका पाला इस ब्रह्म-प्रेतजी से पड़ा था और जिसके चलते इन सोखाओं ने अपनी सोखागिरा छोड़ दी थी।

एक निवेदन करता हूँ प्रेत बनकर नहीं आदमी बनकर। एक तो पेड़ काटें ही नहीं और अगर मजबूरी में काटना भी पड़ जाए तो एक के बदले दो लगा दीजिए। ताकि मेरा घर बचा रहे और आप लोगों का भी।

क्योंकि अगर ऐसे ही पेड़ कटते रहे तो एक दिन प्रकृति असंतुलित हो जाएगी और शायद न आप बचेंगे न आपका घर भी। (एक पेड़ सौ पुत्र समाना, एक तो काटना नहीं और अगर काटना ही हो तो उसके पहले दस-बीस लगाना।)

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आवाजों का रहस्य – Hindi Horror Story

वैसे मै भूत प्रेतों में विश्वास नहीं करता हु लेकिन उस दिन जो मेरे साथ हुआ उसको देखकर मुझे इस किस्से को आपके समक्ष रखना चाहता हु।

एक रात वहा पर हम परिवार के पांच सदस्य मै , मेरी दादी , चाचा ,चाची और मेरा चचेरा भाई थे और मै सोफे पे सो रहा था और दादी से बाते कर रहा था और चाचा ,चाची और मेरा चचेरा भाई उपरी माले पर बने रूम में सो रहे थे।

रात के 10:30 बजे थे तभी मैंने अचानक देखा कि किसी ने गैलरी की बिजली बंद कर दी। जिस रूम में हम बैठे थे वो गैलरी से थोडा दूर था और मुझे वहा से गैलरी में कुछ नहीं दिख रहा था।

यह पक्का करने के लिए मैंने अपने चचेरे भाई आकाशको आवाज़ दी और दुसरी तरफ मुझे हां की आवाज़ सुनाई दी। मै चौंक गया कि वो वहा कैसे पहुच गया क्यूंकि उस गैलरी तक सिर्फ हमारे रूम से ही जाने का रास्ता है।

Hindi Horror Story
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मैंने फिर से तेज आवाज में उसका नाम पुकारा और इस बार भी वोही आवाज़ दुगुनी तेज सुनाई दे रही थी। जब मैंने इसे बार बार सूना तो मेने बिना डरे उस अंधेरी गैलरी में जाने की सोची और यह देखकर हक्का बक्का रह गया कि वहा कोई भी मौजूद नहीं था।

अब मुझे थोडा डर लगने लगा। मै जल्दी से वहा से भागा और मेरे कमरे से होते हुए आकाश के कमरे में गया और देखा कि वो तो सो रहा था।

मैंने उसी समय उसे जगाया और गैलरी वाली घटना बताई। आकाश ने कहा कि मै तो सो रहा था और मै नीचे तो आया ही नहीं मै यह सब सुनकर डर गया कि यह सब कैसे हो गया ?? क्यूंकि कोई चोर भी हमारे कमरे में घुसे बिना उस गैलरी तक नहीं पहुच सकता।

मैंने सोचा ये सब मेरे साथ ही हुआ लेकिन अगले दिन चाचा ने बताया कि उन्हें भी कभी आवाज़े सुनाई देती है लेकिन वो ध्यान नहीं देते है। कुछ महीनो बाद उन्होंने भी वो घर बेचकर दूसरा नया घर ले लिया।

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जंगल की वो रात – Real Horror Stories in Hindi

बात 4 – 5 साल पुरानी है! दशहरे का समय था! मैं अपने दोस्तों के साथ रामलीला देखने गया हुआ था! रामलीला गाँव से कुछ दूर बाज़ार की तरफ थी! रामलीला 12 बजे के करीब ख़तम हुई! मेरे सारे दोस्त घर को निकलने लगे!

मगर मैं वहीं के कुछ दोस्तों के साथ बातें करने लगा! जब मैं वापस जाने लगा तो मुझे कोई अपने साथ का नहीं मिला! अब मैंने सोचा कि यही रुक जाऊं मगर फिर सोचा कि घर वाले परेशान होंगे इसलिये घर के लिये निकल गया! रास्ते में जंगल पड़ता था और मेरे पास कोई टॉर्च भी नहीं थी!

जंगल में घनघोर अँधेरा था! पेड़ों को देख कर भी ऐसा लग रहा था जैसे कोई भूत खड़ा हो!अचानक कोई मेरे सामने से तेज़ी से गुज़रा! मुझे लगा की ये पास के गाँव का कोई लड़का है! मुझे थोड़ी राहत मिली क्यूंकि मुझे कोई साथी मिल गया था! मगर वो लड़का बहुत तेज़ी से भाग रहा था!

मैंने पीछे से आवाज़ लगाई – ओ गोल्ड मेडलिस्ट जरा धीरे चल यार!मगर इतने में वह लड़का रास्ते से बहार घनी झाडियों की तरफ कूद गया!

मुझे हैरानी हुई कि इतनी रात में कोई जंगल की तरफ क्यूं जायेगा! मुझे डर लगने लगा, मैं तेज़ी से अपने कदम बढाने लगा! मगर मुझे ऐसा लग रहा था की वो लड़का मेरे साथ साथ ही चल रहा है! थोड़ी ही दूर एक हनुमान मंदिर था!

मैं भाग कर मंदिर के अन्दर चला गया और सुबह तक वहीँ बैठा रहा! सुबह जब एक दो लोग आते जाते दिखे तो मैं वहां से उठा और घर चला गया!

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मेरा नाम विकी है। में इसी तरह की हिंदी कहानिया , हिंदी चुटकुले और सोशल मीडिया से संबंधित आर्टिकल लिखता हु। यह आर्टिकल “5 best horror stories in hindi language | हॉरर स्टोरी इन हिंदी” अगर आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करे और हमे फेसबुकइंस्टाग्रामट्विटर आदि में फॉलो करे।

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